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यादों में एम.ए. खान

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  असुविधा  का अंक  जुलाई-दिसंबर २०१३  ऍम.ए. ख़ान  पर केंद्रित                                                              यादों में एम.ए. खान   एम0 ए0 खान सोनभद्र के बारे में क्या सोचते थे, यहां के दलितों पीडि़तों के लिए क्या करना चाहते थे यह बात तो उनके साथ ही समाप्त हो गई पर उनकी सोच या विश्लेषण जो कई रिपोर्टों की शक्ल में आज भी उपलब्ध हैं, उनसे साफ पता चलता है कि सोनभद्र अभी भी डरावने अन्धेरे में भटका हुआ है, वे इसी अंधरे को हटना चाहते थे. सोनभद्र के निवासी, पुराने कामरेड, अच्छी देह-भुजा वाले थे, एम.ए. खान साहब. जिनकी शिक्षा-दीक्षा उर्दू तालीम में हुई थी पर वे अंग्रेजी व हिन्दी भी जानते थे, उनका दखल कविता व कहानी में भी था, वे एक्टिविस्ट होने के साथ साथ साहित्यिक भी थे. उनकी जुबान पर मीर, गालिब हमेशा थिरकते रहते थे. उनका जीवन जो कभी उनका था उस दौर में वे कामरेड थे, सी.पी.आई. वाले यानि जवानी के दिनों म...