असुविधा के चालीस साल
असुविधाओं से संघर्ष करती हुई साहित्यिक पत्रिका ‘असुविधा’--- असुविधा के चर्चित ‘अंक’ अमरनाथ अजेय असुविधा के लगभग 19 दुर्लभ अंकों का संकलन हमारे सामने है, जिसके संपादक रामनाथ शिवेन्द्र हैं। अर्थाभाव एवं विपरीत परिस्थितियों में भी पाठकों को सार्थक सामग्री परोसते रहने के कारण इस पत्रिका का नाम असुविधा उचित ही है। असुविधा के प्रकाशन की उम्र लगभग 40 वर्षों से अधिक की है। इस औद्योगिक जिला सोनभद्र में साहित्यिक पत्रिका के रूप में असुविधा ही वह पत्रिका है जिसमें पिछले लगभग 40 वर्षों की सामाजिक सांस्कृतिक व साहित्यिक कार्यकलापों की हलचल देखी जा सकती है। समता एवं सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध असुविधा का संशोधित पहला अंक सन 1993 में प्रकाशित हुआ जो, गणतंत्रा दिवस के उपलक्ष में कविता अंक के रूप में आया, जिसमें संपादक रामनाथ शिवेंद्र एवं संपादन सहयोगी के रुप में अमरना...

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